प्रभु तेरी लीला का कोई पार नहीं पता
जिस रूप में जो देखे वैसा ही नजर आता
अवतार कई तेरे और नाम कई तेरे
कोई कहता ये मेरे कोई कहता ये मेरे
जो जैसा ध्यान करे वैसा ही तू बन जाता
प्रभु तेरी लीला का कोई पार नहीं पता
सच्ची सेवा निष्ठा से जो सेवा करते है
जो शरण पड़े तेरी भवसागर तरते है
इच्छा पूरी करता येसा तू जगदाता
प्रभु तेरी लीला का कोई पार नहीं पता
तुझे भक्ति प्यारी है और भक्त दुलारे है
उनके बिगड़े सब काम , सब प्रभु तुने सवारे है
प्रेमा सुबह दे सब हाल समझ जाता
प्रभु तेरी लीला का कोई पार नहीं पता
अपने भक्तो की सदा तुने आन निभाई है
जब विपत्ति पड़ी मुश्किल तुने लाज बचायी है
युग युग से चला आया प्रभु भक्त का ये नाता
प्रभु तेरी लीला का कोई पार नहीं पता
Showing posts with label प्रभु तेरी लीला का कोई पार नहीं पता. Show all posts
Showing posts with label प्रभु तेरी लीला का कोई पार नहीं पता. Show all posts
Saturday, February 9, 2008
Subscribe to:
Posts (Atom)